आदिवासियों में हलमा रूढी परंपरा को जीवित करने के लिए बोरी में होगा मेघा वृक्षारोपण का आयोजन

 

Voice of Pratapgarh News ✍️ तारूसिंह

प्रतापगढ़। जिले सालमगढ़ के निकटवर्ती गांव बोरी में आदिवासी हलमा रूढी परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए सामूहिक रूप से बोरी में वृक्षारोपण किया जाएगा।

भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के ब्लॉक संयोजक किशन मईडा ने बताया कि भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक मांगीलाल के सानिध्य में हलमा का आयोजन किया जा रहा है। हमीरपुर पठार के पारंपरिक ग्राम सभा के सदस्य राधा किशन ने बताया कि कबीलाई व्यवस्था के आधार पर एक दूसरे की मदद करते थे जिसके खेत में काम करना होता था वह खाटी छाछ में राबड़ी या बाकला बना करके खिलाता था तथा बड़े प्रेम भाव से गीत गाते हुए एक दूसरे के यहां खेतों की निंदाई गुड़ाई करते थे। हेलमा प्रथम मदद करने की एक प्रक्रिया ही नहीं थी बल्कि लोगों में प्रेम भाव बनाए रखने का व्यवस्था भी थी। गोपालपुरी के वरिष्ठ जन कालूबा ने बताया हलमा परंपरा में जिसके पास काम करवाने के बदले में मजदूरी देने के लिए नगद रुपया नहीं है वह व्यक्ति काम के बदले में काम करके इस परंपरा को कायम रख सकता है वह 5 दिन किसी व्यक्ति के यहां जाएगा तो 5 दिन वह व्यक्ति उसके यहां आकर काम करेगा यानी मेहनत भी बचेगी और काम भी जल्दी होगा इसके साथ ही साथ लोगों में पारिवारिक भाईचारा बना रहेगा।आदिवासी समुदाय के जानकारों ने बताया कि पिछली गर्मी हमारी बहुत ही कष्टदायक रही जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया का मुद्दा है अत्यधिक गर्मी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है पेड़ पौधे कम पड़ गए। इसलिए हम अपने घर से पौधा लगाने का प्रयास कर सकते हैं एक-एक पौधा हम सब लगाएंगे तो पर्यावरण का संतुलन बना रहेगा। 7 जुलाई को लगभग 2000 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है साथ ही उनका संरक्षण की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।