पूर्व कैबिनेट मंत्री और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा भैय्या ने की साहस की प्रशंसा
Voice of Pratapgarh News ✍️रिपोर्टर सुनील त्रिपाठी
प्रयागराज: महाकुंभ के पवित्र आयोजन में आज एक ऐसी घटना हुई जिसने मानवता और साहस की नई मिसाल कायम की। कोलकाता से आईं लगभग 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला कलावती देवी ने अपने शिविर के बाहर ठंड में विश्राम कर रहे सैकड़ों दर्शनार्थियों को अपने शिविर के भीतर बुलाकर उनके लिए भोजन, चाय और रुकने की व्यवस्था करवाई। इस नेक कार्य ने महाकुंभ में आए लाखों श्रद्धालुओं के बीच मानवता का सन्देश फैलाया। कलावती देवी के इस साहसिक और मानवता भरे कार्य की सराहना करने के लिए जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैय्या’ स्वयं वहां पहुंचे। उन्होंने बुजुर्ग महिला के साहस और सेवा की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्य ही सनातन धर्म की असली परंपरा और मूल्यों को दर्शाते हैं।
सनातन धर्म के प्रति राजा भैय्या का दृढ़ संदेश
राजा भैय्या ने इस अवसर पर सनातन धर्म के महत्व और उसकी गहराई को लेकर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का इतिहास इतना गहरा और मजबूत है कि इसे मिटाने की कोशिश करने वाले षड्यंत्रकारी कभी सफल नहीं हो सकते। उन्होंने सनातन धर्म के विरोधियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा:
“सनातन धर्म विरोधी जितनी भी कोशिशें कर लें, लेकिन हमारी जड़ें इतनी गहरी हैं कि कोई उन्हें हिला नहीं सकता। यदि सनातनियों ने पलटवार किया, तो विरोधियों को कहीं ठिकाना नहीं मिलेगा। सनातन धर्म का मूल यही है कि किसी को दुख न पहुंचाया जाए और सबको सुख दिया जाए। लेकिन जब धर्म की बात आती है, तो सनातनी अपने अस्तित्व के लिए खड़े हो जाते हैं।
उन्होंने भारत की गौरवशाली परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत हमेशा से प्रेम और सहिष्णुता का प्रतीक रहा है। लेकिन भारत और सनातन धर्म के खिलाफ साजिश रचने वालों को यह समझ लेना चाहिए कि आज का सनातनी जाग चुका है। इतिहास गवाह है कि हमारे देश के हर बच्चे में बलिदान का जज्बा है और हमारी संस्कृति अटल है।
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की महिमा रघुराज प्रताप सिंह ने कहा कि आज भारत बदल गया है। अयोध्या में रामलला का मंदिर बन रहा है, जो हमारे सनातन धर्म की मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने कहा:
“आज का भारत ऐसा है, जहाँ का हर व्यक्ति अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पित है। इतिहास में हमारे वीर योद्धाओं ने जिस तरह अपनी मातृभूमि के लिए बलिदान दिया, उसी तरह आज भी सनातन धर्म के अनुयायी अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए तैयार हैं।
महाकुंभ में कलावती देवी द्वारा दिखाया गया साहस और सेवा भाव, और राजा भैय्या द्वारा उनके कार्य की सराहना, भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के मूल्यों को और अधिक प्रबल करते हैं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि मानवता और सेवा का संदेश सनातन धर्म के मूल में है, और इसे जीवित रखने के लिए हर सनातनी अपना योगदान दे रहा है।
