मां भैसासरी माता की एक ही प्रतिमा में विराजमान हैं नो दुर्गा की रानी

Voice of Pratapgarh News ✍️रिपोर्टर हरिश जटिया

हजारों श्रद्धालू पहुँचते दर्शन करने

प्रतापगढ़ सुखेडा मध्यप्रदेश व राजस्थान की सीमा से लगते हुए अपना अलग रूप निखारति दिखाई देती है भैसासरी माता की एक ही प्रतिमा मे विराजीत नो दुर्गा की रानी।
ऐसी प्रतिमा पुरे क्षेत्र मे कही नहीं है, सुखेड़ा के नीनोर नदी के तट पर विराजीत है।
कई वर्षो पुरानी प्रतिमा का अपना इतिहास कुछ अलग है, यह प्रतिमा दिन से लेकर दोपहर और रात्रि मे अलग अलग रूप मे दिखाई देती है, यहां आने वाले हजारों भक्त कहते है जो भी इस मंदिर मे आता है उसकी हर मनोकामनाये पूरी होती है।
प्रत्येक रविवार को माताजी द्वारा भक्तो के सभी दुख दर्द दूर करती है।

300 साल पूरानी है मां भैसासरी माता की प्रतिमा

पुजारी हर्षित जोशी ने बताया की मां भैसासरी माता की प्रतिमा 300 वर्ष पुरानी है बुर्जुग लोगों का कहना है पीढ़ी दर पीढ़ी से यहां माता रानी का चमत्कार हैं कई लोगों का यहां माता रानी के आशीर्वाद व दर्शन से दुख दर्द दूर होते हैं यहां पर विगत 20 से 25 वर्ष से पंड्या गौतम लाल जटिया मां भैसासरी माता की सेवा चाकरी करते हैं यहां पर नवरात्रि में राजस्थान व मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से नवरात्रि के भक्त यहां आते है व अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर यहां नारियल अगरबत्ती सहित तिरसुल पर लच्छा बांधते हैं वहीं यहां पर मां भैसासरी माता जी के आशीर्वाद से सुनी गोद भी भरी जाती है जिससे मां भैसासरी माता जी का आशीर्वाद मानते हैं।
नवरात्री पर्व पर नो दिन के कार्यक्रम मे मुख्यरूप से सप्तमी पर खप्पर का कार्यक्रम होता है खप्पर की आरती मे हजारों की तादात मे पुरुष, महिलाओ से लेकर बच्चे खप्पर की आरती लेने पहुंचते है।
नवरात्री के आख़री दिन हवन होने के पश्चात महा आरती होती है एवं महा प्रसादी वितरण की जाती है।