Voice of Pratapgarh News@ किशोर कुमार छाबड़ा।
प्रतापगढ़। सोमवार शीतला सप्तमी के दिन श्री राजराजेश्वरी मंदिर परिसर किला रोड शीतला माता मंदिर प्रगति नगर लक्ष्मी नगर मंदिर परिसर में शीतला माता मंदिर में शीतला सप्तमी पर शीतला सप्तमी के ठंडे भोजन का भोग लगा कर की गई पूजा। होली के बाद शीतला सप्तमी पर्व आता है राजस्थान में ही नहीं पूरे उत्तरी भारत में यह पर्व श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है माता शीतला को मां भगवती का भी रूप माना जाता है। इस दिन माता को ठंडे खाने का भोग लगाया जाता है इस दिन ठंडे जल से स्नान कर पूजन करने से माता शीतला प्रसन्न होती है व रोगों से बचाकर रखती है। इनकी लोककथा है कि शीतला माता बुढ़िया का रूप धारण करके राजस्थान के डूंगरी गांव में पहुंची और उन्होंने देखा कि मेरी कौन-कौन पूजा करता है। अचानक गली में गुजर रही थी कि चावल का उबला हुआ पानी किसीने माता के ऊपर डाल दिया जिससे माता के शरीर पर गिरने से छाले ही छाले हो गए और पूरे शरीर में जलन होने लगी तो माता दर्द के मारे तड़पने लगी। इस समय एक कुम्हारन महिला घर के बाहर आई वह माता को घर के अंदर ले गई और उस महिला ने बूढी महिला के ऊपर ठंडा पानी ही पानी डाल दिया जिससे उस बूढी महिला के शरीर में कुछ राहत मिली रात के टाइम रबड़ी व दही को लेकर आई कुम्हारन महिला ने उसे बूढी मां से कहा मैं गरीब औरत हूं मेरे पास कुछ भी नहीं है आप इसे ही खा लो एवं उस कुम्हारन महिला ने रात को बूढी मां के बाल बनाए और बुढ़ी मां ने कहा धरती पर मैं देखने आई हूं कौन-कौन मेरी पूजा अर्चना करता है और वह अपने असली रूप में शीतला माता प्रकट हुई और कुम्हारन के गधे पर बैठकर वरदान दिया की मेरी पूजा अर्चना करने वाली महिला अखंड सौभाग्यवती रहेंगी। जिस पर कुम्हारन महिला भाव विभोर हो गई और माता शीतला ने कहा कि इसका विशेष पुण्य कुम्हार जाति को ही होगा। डूंगरी में शीतला माता का भव्य मंदिर बना हुआ है जिसमें सप्तमी व अष्टमी को विशेष पूजा अर्चना होती है इस दिन शीतला माता की व्रत व पूजा करने से सारी मनोकामना पूर्ण होती है।



