
प्रतापगढ़। सकल जैन समाज द्वारा श्री आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव अंतर्गत शोभायात्रा मुनि सुयत्न सागर मुनी सुंदत सागर के सानिध्य में 9:00 बजे गुमानजी मंदिर से बैंड बाजे ढोल नगाड़ों के साथ लोहार गली गोपालगंज गांधी चौराहा सदर बाजार माणक चौक होते हुए श्री सन्मति समोसारण नया मंदिर पहुंची शोभा यात्रा में महिला पुरुषों ने डांडिया रास किया। ऋषभदेव मंदिर एवं आदिनाथ मंदिर पर भक्त जनों ने चवर एवं डांडिया नृत्य किया।
आदिनाथ जन्म कल्याणक शोभा यात्रा पूर्णाहुति पश्चात् सन्मति समवसरण मे आयोजित धर्म सभा मे आदिनाथ भगवान की स्तवन शशि बंडी, विनोद नरसिंहपुरा, निशिता जैन ने मंत्र मुग्ध करने वाले भजनो के माध्यम से की।
इस अवसर पर सानिध्य दाता मुनि श्री सुदत्त सागरजी महाराज ने अपने प्रासंगिक प्रवचन मे कहा कि इस दुनिया क़ो अशी- मशी-कृषि -शिल्प -कला -वाणिज्य जैसे षटकर्म के प्रणेता भगवान आदिनाथ हुये है, हम सभी का सौभाग्य है कि चौथे आरे (काल ) मे होने वाले भगवान के कल्याणक हमे पांचवे काल मे मनाने का अवसर मिला है।
मुनि श्री ने यह भी कहा कि पंच परमेष्टि मे से तीन का दर्शन आपको मिल रहा है यह भी किसी परम् सौभाग्य से कम नहीं है!
प्रतापगढ़ नगर के कुलदीपक मुनि श्री सूयत्न सागर ने कहा कि माता के गर्भ मे आने के साथ ही जीव मे संस्कारो का बीजारोपण प्रारम्भ हो जाता है, भगवान आदिनाथ ने मुनि दीक्षा ग्रहण करने के साथ ही आहार के लिए निकले लेकिन उस काल मे लोगो क़ो आहार दान को बनाने का, दान देने का ज्ञान नहीं था परमात्मा ने उस वक्त कि प्रजा क़ो 72-64 कलाओ के माध्यम से जीवन जीने का ढंग सिखाया था। आज मरुदेवी माता के दिए हुए तप ओर त्याग के संस्कारो के आधार पर ही दुनिया चल रही है!
सकल जैन समाज प्रतापगढ़ कि जनगणना कार्यक्रम प्रारंभ किया पत्रक का विमोचन जैन समाज के प्रतिनिधि शांतिलाल डोसी गोपी, गजेंद्र चंडालिया, धनपाल हड़पावत, शैलेश डावडा, संजय बगेरिया राकेश मारवाड़ी पंकज जैन, महेंद्र शाह द्वारा किया गया।
धर्म सभा के पश्चात सकल जैन समाज की नवकारसी स्नेह भोज गुमानजी मंदिर परिसर में हुआ।



