Voice of Pratapgarh News@ महेश कुमार गुप्ता।
भीषण गर्मी में लोगों को शीतल जल उपलब्ध कराना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य : कवि कृष्ण कुमार सैनी
( बेजुबान जानवरों के साथ साथ इंसानों के लिए भी समर्पित है संस्था – घनश्याम जायसवाल )
दौसा। भीषण गर्मी के इस दौर में पेयजल की महती आवश्यकता है। प्याऊ के अभाव में लोगों को बाजार से पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही थी। इस परेशानी को कुछ कम करने के लिए दौसा शहर में बेज़ुबान जानवरों के लिए कार्य करने वाली बेज़ुबान सेवा टीम श्री राम पशु पक्षी सेवा संस्थान,दौसा द्वारा सार्वजनिक प्याऊ खोली जा रही है। संस्था का यह प्रयास सराहनीय है। सार्वजनिक प्याऊ की शुरुआत सैथल मोड़ पर, अलवर मिष्ठान भंडार के सामने शुरू की है।
संस्था के संरक्षक घनश्याम जायसवाल गुरुजी ने बताया कि बेजुबान सेवा टीम श्रीराम पशु पक्षी सेवा संस्थान बेजुबान जानवरों के इलाज सहित चारा पानी की व्यवस्था करती है। साथ ही प्राणी मात्र के भलाई के लिए कार्य कर रही है। इस निमित्त उन्होंने गर्मियों में लोगों की प्यास बुझाने के लिए 11वीं प्याऊ का शुभारंभ सैथल मोड, अलवर मिष्ठान भंडार के सामने विधिवत रूप से किया है। जिसमें मीठा एवं ठंडा शुद्ध जल हर समय लोगों को पीने के लिए उपलब्ध रहेगा। पानी पीने वाले लोगों ने कहा कि लोगों को शीतल जल उपलब्ध कराना सराहनीय कार्य है। अन्य समाजसेवियों को इस कार्य से प्रेरणा लेना चाहिए।
मिडिया प्रभारी एवं प्रवक्ता कवि कृष्ण कुमार सैनी ने बताया कि नगरपरिषद द्वारा दौसा शहर में कहीं भी प्याऊ का इंतजाम नहीं किया है। इस कारण राहगीर परेशान होते हैं। दोपहर के समय बाजार में जरूरी कार्यों के लिए आने वाले लोगों का जब कंठ सूखता है तो वह पानी तलाशते हैं लेकिन न मिलने पर उन्हें पानी की बोतल या पाउच खरीदकर प्यास बुझानी पड़ती है। अतः लोगों की परेशानी कों देखते हुए श्री राम पशु पक्षी सेवा संस्थान द्वारा अब तक 11 सार्वजनिक प्याऊ जनहित में पानी पीने के लिए लगाई जा चुकी है। जिनमें सैथल पुलिया के पास, कलेक्टर सर्किल, फर्स्ट टॉवर के सामने, सरकारी हॉस्पिटल के पास, गाँधी तिराहा, कलाली मंदिर के सामने, रेलवे फाटक, दुर्गा नर्सिंग होम के पास आदि विभिन्न जगहों पर संस्था द्वारा प्याऊ संचालित है।
इस अवसर पर संस्था के संरक्षक घनश्याम जायसवाल, दिनेश प्रजापति, राजेश सैनी, कवि कृष्ण कुमार सैनी, महेन्द्र जायसवाल, कृष्ण शर्मा, विनीत जायसवाल आदि मौजूद रहे।



