Voice of Pratapgarh News ✍️ पंडित मुकेश कुमार
चित्तौड़गढ़। परिवादी विजयसिंह पिता शंकरलाल सांखला निवासी आरणी तहसील राशमी जिला चित्तौड़गढ़ ने एच.डी.एफ.सी. लाईफ इंश्योरेन्स कंपनी व अन्य के विरुद्ध एक परिवाद न्यायालय जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग चित्तौड़गढ़ में अधिवक्ता भगवतसिंह गिलूण्डिया, कुलदीप सुवालका, राजकुमार वैष्णव के मार्फत इस आशय का पेश किया कि विपक्षी द्वारा प्रार्थी के पिता शंकरलाल ने लक्ष्मी ग्राम सेवा सहकारी समिति आरणी से सहकारी किसान योजना के तहत ऋण लिया था तथा उक्त ऋण के साथ प्रार्थी के पिता का बीमा कंपनी ने 1321.50/- रुपये प्रिमियम प्राप्त कर सदस्य सुरक्षा बीमा के तहत 1,50,000/- रुपये का शंकरलाल बीमा किया गया, जिसके अन्तर्गत बीमा धारक की किसी भी प्रकार से मृत्यु होने पर उसके नॉमिनी को 1,50,000/- रुपये क्लेम राशि दिये जाने का प्रावधान था तथा शंकरलाल की मृत्यु के बाद प्रार्थी ने अविलम्ब संपूर्ण दस्तावेजी कार्यवाही पूर्ण कर बीमा कंपनी में क्लेम फाईल कर दी, परन्तु बीमा कपंनी क्लेम राशि अदा करने से मना कर दिया जिससे प्रार्थी ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें विपक्षी ने अपना जवाब पेश कर तर्क दिया कि प्रार्थी के पिता के नाम से किसी प्रकार की कोई पॉलिसी जारी नही की और परिवाद में पॉलिसी संख्या भी लिखी हुई नही है, न कोई दस्तावेज पेश किये एवं बीमा पॉलिसी में नॉमिनी का नाम भी विजय सिंह नही होकर विक्रम सिंह वर्णित है, जिससे क्लेम देय योग्य नही है। परिवादी के अधिवक्ता की ओर से तर्क दिया गया कि उक्त पॉलिसी ग्राम सेवा समिति व सीकेएसबी बैंक द्वारा बिमित व्यक्ति के खाते से प्रिमियम काटकर की गई, और उक्त पॉलिसी ग्रुप पॉलिसी होकर पॉलिसी में विजयसिंह का उर्फ नाम विक्रमसिंह नाम लिखा था, जो सही लिखा हुआ है, जिससे समस्त पॉलिसी की जानकारी विपक्षी बैंक व समिति में निहित होकर दोनों ने प्रार्थी को कोई पॉलिसी भी नहीं दी, जिससे बीमा कंपनी व दोनों विपक्षी बीमा राशि भुगतान के लिये जिम्मेदार है। मंच के अध्यक्ष प्रभुलाल आमेटा व सदस्या राजेश्वरी मीना व सदस्य अरविन्द कुमार भट्ट ने परिवादीगण के तर्को से सहमत होते हुए विपक्षी बीमा कंपनी के विरूद्ध आदेश सुनाया कि विपक्षी बीमा कंपनी एचडीएफसी लाईफ इंश्योरेन्स कंपनी लिमिटेड प्रार्थी को क्लेम राशि 1,50,000/- रुपये का भुगतान करे और उक्त राशि पर परिवाद प्रस्तुति दिनांक 12/11/2021 से 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज दो माह के अन्दर अदा करे तथा तथा परिवादी को हुए परिवाद व्यय व अभिभाषक शुल्क के 5,000/- रुपये अदा करने का आदेश प्रदान किया। विलम्ब होने पर 9 प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करे।



