छलनी में पानी नहीं टिकता छली मानव का मन धर्म से नही भीगता: मुनि श्री सुधींद्र

 

Voice of Pratapgarh News ✍️ पंडित मुकेश कुमार 

डूंगरपुर। गैंजी में आचार्य श्री सुनील सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री सुधीन्द्र सागर , क्षुल्लक श्री अकम्प सागर महाराज का चातुर्मास चलते पर्युषण पर्व का आज तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया श्रेष्ठि अनिल जैन ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मुनिश्री ने आर्जव धर्म का महत्व बताते हुए कहा आर्जव अर्थात छल कपट नही करना सरल बनो जैसे छलनी में पानी नहीं टिकता ऐसे छल करने वाले मनुष्य का आत्मा धर्म रूपी जल से कभी नहीं भीगता छली मायाचारी करने वाला व्यक्ति समझता है में दूसरे को ठग रहा हू बेखूब बना रहा हू धोका दे रहा हू किंतु वह अपने से ही धोका कर रहा है स्वयं ठगा रहा है छल करने वाला जीव त्रियंच गति में पशु पक्षी कीड़े आदि बन कर जीव घोर कष्ट को पाता है। किसान एक बीघा के खेत में एक मण धान का बीज चाहिए उसकी जगह वह आधा ही बीज डालेगा चार माह बाद स्वयं को ही धक्का लगेगा जहा पच्चीस बोरी अनाज मिलने की जगह आधा ही मिलेगा मिलावट करना अधिक लेना कम नाप तोल कर देना असली वस्तु की कीमत लेकर नकली देना छल है बच्चे मां बाप व गुरुजनों के सामने पढ़ने का ढोंग कर उनके पीठ पीछे पढ़ते नही वह सोचते हे हम इन्हे पढ़ने के नाम पर धोका दे रहे हैं किंतु वास्तविक धोका परीक्षा के समय बच्चों के साथ में ही होता है। छली व्यक्ति का इस जन्म में और आगामी भवों में अहित ही होता है इसलिए छल कपट छोड़ कर सरल स्वभावी बनो यहां और पुनर्जन्म में सभी जगह सुख प्राप्त होगा।

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