Voice of pratapgarh News ✍️पत्रकार महेश पीलूखेड़ा
दौसा। देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर उपखंड क्षेत्र में लोक परंपराओं की अनुपम झलक देखने को मिली। प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए मंगलवार को महिलाओं व बालिकाओं ने हर्षोल्लास से गुड़िया-गुड्डू का विवाह सम्पन्न कर उन्हें जल में प्रवाहित किया।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास की शुरुआत होती है। इस अवसर पर शादियों व मांगलिक कार्यों पर चार माह तक विराम लग जाता है।
स्थानीय पंडित गोविंद शर्मा डूंगरपुर व कुंजीलाल डीलर ने बताया कि इस दिन कपड़े से बनी गुड़िया और गुड्डू की प्रतीकात्मक शादी कर महिलाएं और बालिकाएं उन्हें जल में प्रवाहित करती हैं। यह परंपरा जीवन चक्र, रिश्तों की मर्यादा और प्रकृति से सामंजस्य का प्रतीक मानी जाती है।
शहर के विभिन्न मोहल्लों में मंगलवार को बालिकाओं ने उत्साह के साथ गुड़िया-गुड्डू को सजाया, पारंपरिक गीत गाए और फिर विधिपूर्वक उनका विवाह कर जल में विदाई दी। इस आयोजन में बालिकाओं के साथ महिलाएं भी पूरे रीति-रिवाज़ों से सम्मिलित हुईं। ऐसी लोक परंपराएं न केवल सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखती हैं, बल्कि नई पीढ़ी को हमारी परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बनती हैं।



