Voice of Pratapgarh News ✍️ पंडित मुकेश कुमार
डूंगरपुर। गेंजी में आचार्य सुनील सागर महाराज के शिष्य मुनि सुधीन्द्र सागर क्षुल्लक अकम्प सागर महाराज के सानिध्य में उत्तम संयम धर्म मनाया समाज सेवी अनिल जैन महेश जैन ने जानकारी दी कि संघ के महेंद्र के सताईसवा उपवास है यह बत्तीस करेंगे मुनि के दसवां उपवास है। मयंक के दसवां उपवास है । यह सोलह , सोलह उपवास करेंगे, तथा श्रावकों में सत्रह पुण्यात्मा के आज छटवा उपवास है यह दस दस उपवास करेंगे जिसमें महिला पुरुष बच्चे सामिल है। महेश , प्रेमिला , जयदीप,पिंकी चिरंदिप,अंजली, मेनका , रेणुका , संदीप , सारिका , दीपिका , रिद्धम , विनोद, नरेंद्र संदीप , जयवंती , निशिका , प्रेमलता , ने दस उपवास की धारणा बनाई है मुनि श्री ने संयम धर्म का महत्व बताते हुए कहा मन वचन काय की शुद्धि पूर्वक चेतन अचेतन या अन्तरंग बहिरंग परिग्रह का त्याग संयम कहलाता है। त्रस जीवों की मन वचन काय से रक्षा करना इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करना गृहस्थों का एक देश संयम कहलाता है। सम्यक भाव से पाप क्रिया से सदा के लिए विरक्त होना संयम कहलाता है पाप क्रिया अशुभ मन वचन काय को पाप क्रिया कहा है वह सब ओर से पाप आश्रव का कारण है उसका रुकना संयम कहलाता है पांच महाव्रत पांच समिति तीन गुप्ति इन तेरह प्रकार के चारित्र में हमेशा पूर्ण प्रयत्न करना संयम कहलाता है। अथवा प्राणी हिंसा ओर इन्दिय विषयों में अशुभ प्रवृत्ति का रुकना संयम कहलाता हैं। प्राणी रक्षण और इंद्रिय जय विषय का त्याग है लक्षण जिसका वह संयम कहलाता है प्राणी संयम 17 प्रकार का है पृथ्वी काय जल काय अग्नि काय वायु के तथा वनस्पति काय का यत्न से रक्षण करना पांच प्रकार का संयम कहलाता है दो इंद्री तीन इंद्री चार इंद्री और पांच इंद्री जीवों की रक्षा की जाती है वह चार प्रकार का संयम कहलाता है अजीव आदि का नाखून आदि से छेद नहीं करना अजीव संयम कहलाता है ज्ञान के उपकरण आदि का नेत्रों से देखकर मार्जन करना चाहिए धर्म के नित्य उपयोगीउपकरणों को व्यवस्थित करके प्रतिदिन देखना चाहिए क्योंकि उसमें संम्मूर्च्छन जीवों की उत्पत्ति संभव है मन वचन काय को अपने बस में करना तीन प्रकार का संयम है चोदह प्रकार के जीव समासों का रक्षण करना प्राणी संयम कहलाता है राजेंद्र कोठारी लक्ष्मी लाल मास्टर सूरजमल सुरेश चंद्र भाग्यचंद कनकमाल भाग्यचंद तोरावत परिवार मौजूद रहा।



