Voice of pratapgarh News✍️ पत्रकार महेश पीलूखेड़ा
नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। हर रविवार सफाई व्यवस्था मानो छुट्टी पर चली जाती है। नगर के मुख्य बाजारों और गलियों में सफाईकर्मी सुबह झाड़ू तो लगा जाते हैं, मगर खंदक गणगौरी बाज़ार में कचरे का ढेर वहीं का वहीं छोड़ जाते हैं — और वह भी पूरे दिन भर तक फिर दूसरे दिन सोमवार को सुबह उठता हैं!
सवाल यह उठता है कि जब कचरा उठाना ही नहीं है, तो झाड़ू लगाने का मतलब ही क्या है?
बदबू से बेहाल व्यापारी, ग्राहक भी परेशान
कचरे की इस दुर्गंध से दुकानदारों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों और राहगीरों को ग्राहक समझाने तक में दिक्कत आती है। कई दुकानदारों का कहना है कि बदबू के कारण दिनभर सिरदर्द और उल्टी जैसा महसूस होता है। एक दुकानदार ने नाराजगी जताते हुए कहा— नगर परिषद रविवार को कचरा नहीं उठवाती, तो सफाईकर्मी को भी छुट्टी देनी चाहिए, कम से कम झाड़ू से धूल तो न उड़े।
स्थानीय प्रशासन मौन, जनता त्रस्त: खंदक गणगौरी बाजार में हर रविवार यही हाल होता है, लेकिन नगर परिषद के अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे रविवार को ‘सिस्टम’ भी छुट्टी पर चला जाता है।
क्या नगर परिषद उठाएगी जिम्मेदारी? अब देखना यह है कि नगर परिषद इस गंभीर समस्या पर कोई त्वरित और स्थायी समाधान देती है या हर रविवार को शहरवासियों को बदबू और कचरे के बीच जीने को मजबूर होना पड़ेगा। ???? यह केवल गंदगी की बात नहीं — यह व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है।



